दिल्ली आज ऐसी राजधानी बन चुकी है जहाँ जीना भी एक चुनौती जैसा लगता है। हवा का AQI 500 से ऊपर, हर सांस में ज़हर, बच्चे मास्क पहनकर स्कूल जाते हुए, अस्पतालों में बढ़ती भीड़, सड़कों पर धुंध और ट्रैफिक, यह हाल किसी भी आधुनिक राजधानी का नहीं होना चाहिए। यमुना की गंदगी और गंदे पानी की समस्या, दिल्ली का एक बड़ा पर्यावरणीय संकट है। दिल्ली पर जनसंख्या का भारी दबाव, सीमित भूमि, भूकंप का खतरा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे इसे आने वाले समय में और कमजोर बनाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना बिल्कुल स्वाभाविक है कि क्या भारत को अपनी राजधानी बदलने पर विचार करना चाहिए? दुनिया के कई देशों ने समय की ज़रूरत समझकर अपनी राजधानी बदली है ब्राज़ील ने ब्रासीलिया बनाई, कज़ाखस्तान ने अस्ताना को चुना, इंडोनेशिया नई राजधानी नुसंतारा बना रहा है। यह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं थे, बल्कि भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए लिए गए थे। भारत भी आज उसी मोड़ पर खड़ा है जहाँ एक नई दिशा चुनने की आवश्यकता महसूस होती है। जब हम भारत के इतिहास को देखते हैं, तो दो बड़े नगर सामने आते हैं: हस्तिनापुर और अयोध्या।हस्तिनापुर महाभारत का राजनीतिक कें...