अब BOT-cum-Annuity मॉडल पर जोर क्या भारत के सड़क क्षेत्र में PPP मॉडल का नया दौर शुरू होने वाला है? पिछले एक दशक में भारत ने राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। देश में एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। इस सफलता के पीछे सरकार की नीतियों के साथ-साथ Public-Private Partnership (PPP) मॉडल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2015 के बाद Hybrid Annuity Model (HAM) सड़क निर्माण का सबसे लोकप्रिय मॉडल बनकर उभरा। इस मॉडल ने उस समय सड़क क्षेत्र को नई दिशा दी, जब निजी निवेशक BOT (Build-Operate-Transfer) परियोजनाओं से दूरी बनाने लगे थे। HAM के माध्यम से हजारों किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ और कई वर्षों से रुकी परियोजनाओं को गति मिली। लेकिन समय के साथ इस मॉडल की कुछ व्यावहारिक सीमाएँ भी सामने आने लगीं। कुछ परियोजनाओं में सड़क की गुणवत्ता, रखरखाव और दीर्घकालिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठे। इन्हीं अनुभवों से सीख लेते हुए National Highways Authority of India (NHAI) अब एक नया BOT-cum-Annuity Model लेकर आई...
कागज़ पर यह बस एक आदेश है, एक रूटीन प्रक्रिया। लेकिन मेरे लिए यह हमेशा एक नई शुरुआत और एक अधूरा अंत साथ लेकर आता है। शायद मेरे संस्थान की यही प्राथमिकता होगी—जहाँ ज़रूरत, वहीं भेज दो। और शायद यह भी सच है कि मैं नई जगह पर अपना और बेहतर दे पाऊँगा, या मेरी जगह जो आएगा, वह मुझसे बेहतर कर पाएगा। इन बातों में तर्क है, लेकिन इनके बीच एक सच्चाई हमेशा खड़ी रहती है l हर बार कुछ पीछे छूट जाता है। हर बार की तरह इस बार भी मैं अपना बैग समेटूंगा। कुछ सामान कम करूंगा, कुछ यादें फिर पीछे छोड़ दूंगा। नया शहर, नए लोग, नया कमरा… और वही पुराना मैं। फर्क बस इतना है कि अब पहली बार जैसा उत्साह नहीं होता और आखिरी बार जैसा दर्द भी नहीं। यह सब अब एक आदत जैसा हो गया है चलते रहने की आदत, बिना पूरी तरह कहीं रुके। मुझे आज भी याद है, जब बैंक जॉइन किया था। इंटरव्यू में पहला सवाल था—“Are you ready to relocate?” मैंने बिना सोचे जवाब दिया था—“I am from Bihar.” शायद उस एक जवाब में ही मेरी पूरी ज़िंदगी छिपी थी। हमारे लिए “relocate” कोई विकल्प नहीं होता, वह तो बचपन से तय रास्ता होता है। पढ़ाई के लिए घर छोड़ना, नौकरी के लिए ...