कुछ साल पहले तक ‘Leftism’ यानी वामपंथी सोच सिर्फ JNU, DU या FTII की दीवारों तक सिमटी थी। वहाँ के कुछ लड़के-लड़कियाँ बहस करते थे, क्रांति के नारे लगाते थे, और शाम को कैंटीन में चाय पीते हुए पूंजीवाद को गालियाँ देते थे। हम सोचते थे — “ठीक है, चार किताबें पढ़ ली हैं, थोड़े दिन में समझ आ जाएगा।” पर अब? अब यह वायरस घर के दरवाज़े तक नहीं, आपके ड्रॉइंग रूम के सोफे पर बैठ चुका है। चुपचाप, इंस्टाग्राम की रील्स और Netflix के जरिये आपके बच्चे की सोच में ज़हर घोल चुका है और आपको पता भी नहीं चला। आपने उसे अच्छे स्कूल में भेजा, सबसे महंगा स्मार्टफोन दिया, coding class करवाई… लेकिन आपने ये नहीं देखा कि अब वो आपको ही सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है। अब वही बच्चा कहता है — “Respect is earned, not given. Even parents.” अब आपकी नसीहत उसे ज़हर लगती है। आपकी चुप्पी उसकी आज़ादी है। आप कुछ कहो, तो बोलेगा — “Stop being toxic.” और आप डर जाते हो कि कहीं उसका ‘mental health’ न बिगड़ जाए। बोलिए — क्या ये सही है? क्या आप हर सुबह बच्चे को उठाने जाते हो और वो 9 बजे तक सोया रहता है — बोलता है, “Don’t dis...
कृष्ण: हे पार्थ, यह केवल युद्धभूमि नहीं है—यह समय का चौराहा है। यह केवल एक युग का अंत नहीं, बल्कि एक नए विश्व क्रम का उदय है। जो व्यवस्था दशकों से स्थिर दिखती थी, अब वह बदल रही है। शक्ति के केंद्र खिसक रहे हैं, गठबंधन पुनः बन रहे हैं, शक्ति संतुलन डगमगा रहा है, और दूर कहीं Iran और United States के बीच बढ़ता संघर्ष आने वाले युग की दिशा तय कर रहा है। तुम इसे एक दूर का युद्ध समझने की भूल मत करो। यह केवल संघर्ष नहीं है, पार्थ—यह “New World Order” का जन्म है। पार्थ (गंभीर स्वर में): मधुसूदन, क्या वास्तव में दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है? या यह केवल एक अस्थायी उथल-पुथल है? कृष्ण: परिवर्तन कभी शोर करके नहीं आता, पार्थ—वह धीरे-धीरे संरचनाओं को बदलता है। देखो—Strait of Hormuz पर बढ़ता तनाव केवल समुद्री मार्ग का प्रश्न नहीं है, यह ऊर्जा के नियंत्रण का प्रश्न है। ऊर्जा पर नियंत्रण, अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण है—और अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण, विश्व व्यवस्था को परिभाषित करता है। जो राष्ट्र इस समीकरण को समझते हैं, वही नए विश्व क्रम के निर्माता बनते हैं। पार्थ: तो क्या यह शक्ति का पुनर्वितरण ...